Sunday, March 12, 2017

सभी देशी ,विदेशी फेस बुक मित्रो और उनके परिवार जनों  को होली महापर्व पर शुभकामनायें ,होलिका माई आप सभी को  सम्पूर्ण वर्ष यश ,मान सम्मान ,धन ऐश्वर्य प्रदत करें यही हमारी कामना है ,
                                                                             कांति  प्रकाश चौहान दिल्ली

Friday, March 10, 2017

जो दूसरों के घर जलाते हैं
उनके घर तपिश से ही, जल जाते हैं ,
उनके घर तो फिर बन जाते हैं
परन्तु जलाने  वालों के घर राख हो जातें हैं

Saturday, March 4, 2017

प्यार करने वाले गर  कत्ल भी करते हैं तो
 तलवार से नहीं बल्कि प्यार की मार से ।

Thursday, March 2, 2017

हर शख्स अपनी जिंदगी के अफ़साने सूना रहा है
मेरी जिंदगी में अफ़साने ही नहीं हैं तो मैं सुनाऊँ कैसे

Wednesday, March 23, 2016

SASURAL KI HOLI

सालियां सलहज भाबियां
सब मुझसे चिपट गई
रंग वा गुलाल के बदले
लिपस्टिक वा सिन्दूर
गालों पे रगड़ गईं
बजाय कुछ पिलाने के
लोटा खली कर गईं
सारी लस्सी खुद पीकर
मुंह में निप्पल लगाकर
खुद वहां से चली गईं
करने को इजहार होली का ।
करके सब ने एका
हल्की खेलने का
मानो ले लिया हो ठेका
फाड़ दिए सब वस्त्र मेरे
बचा रहा केवल लंगोटा
खेल रहा होली ससुराल में
बनकर के मैं
भैंसा बुग्गी का बन झोटा ।

Tuesday, March 26, 2013

"होली का संदेश "

होली का संदेश  यही है ,
आलिंगन कर ,वैमनस्य मिटायें
मस्तक चूमकर प्रेम दर्शायें
वात्सल्यमयी शब्दों का प्रयोग कर
ध्रष्टता को त्याज्य कर जाएँ ,
होली का संदेश  यही है ,
अबीर गुलाल एक दूजे को लगाकर
जल रंगों से सरोबार हो जाएँ
मिष्ठानों को मुख अर्पण कर
मधुरता का आभाष कराएं
होली का संदेश  यही है ,
धर्म ,प्रथाओं के द्वार तोड़कर
सभी धर्मावलम्बी एक हो जाएँ
नाचें ,गायें मदमस्त हो जाएँ
होली का हुडदंग निर्विरोध मनाये
होली का संदेश  यही है ,
भारत माता के अंचल की होली दर्श कर
देवतागण भी सकुचा जाएँ
पर भारतियों का अतुल प्रेम देखकर
पुष्प अर्पण कर आनंदित हो जाएँ
होली का सन्देश यही है |

Thursday, March 21, 2013

होली पर हास्य की फुल्झादियाँ

महीनों से था इन्तजार
मुझे रंगीली होली का
करने को कपोलों प्रहार
किसी सांवली सलोनी का
मूक बन कर सोचते रहे
वो आएगी खेलने होली
कीचड मल के मेरे मुख पे
कब कब में चली गई
कर ना सके दीदार
उस सांवली सलोनी का ,
मजा किरकिरा हो गया
जब रंगदार होली का
छुटाने चले कीचड
तब हमको पता चला
कितना चिपकू था प्यार
सावली सलोनी शर्मीली चमेली का \