Wednesday, March 23, 2016

SASURAL KI HOLI

सालियां सलहज भाबियां
सब मुझसे चिपट गई
रंग वा गुलाल के बदले
लिपस्टिक वा सिन्दूर
गालों पे रगड़ गईं
बजाय कुछ पिलाने के
लोटा खली कर गईं
सारी लस्सी खुद पीकर
मुंह में निप्पल लगाकर
खुद वहां से चली गईं
करने को इजहार होली का ।
करके सब ने एका
हल्की खेलने का
मानो ले लिया हो ठेका
फाड़ दिए सब वस्त्र मेरे
बचा रहा केवल लंगोटा
खेल रहा होली ससुराल में
बनकर के मैं
भैंसा बुग्गी का बन झोटा ।

Tuesday, March 26, 2013

"होली का संदेश "

होली का संदेश  यही है ,
आलिंगन कर ,वैमनस्य मिटायें
मस्तक चूमकर प्रेम दर्शायें
वात्सल्यमयी शब्दों का प्रयोग कर
ध्रष्टता को त्याज्य कर जाएँ ,
होली का संदेश  यही है ,
अबीर गुलाल एक दूजे को लगाकर
जल रंगों से सरोबार हो जाएँ
मिष्ठानों को मुख अर्पण कर
मधुरता का आभाष कराएं
होली का संदेश  यही है ,
धर्म ,प्रथाओं के द्वार तोड़कर
सभी धर्मावलम्बी एक हो जाएँ
नाचें ,गायें मदमस्त हो जाएँ
होली का हुडदंग निर्विरोध मनाये
होली का संदेश  यही है ,
भारत माता के अंचल की होली दर्श कर
देवतागण भी सकुचा जाएँ
पर भारतियों का अतुल प्रेम देखकर
पुष्प अर्पण कर आनंदित हो जाएँ
होली का सन्देश यही है |

Thursday, March 21, 2013

होली पर हास्य की फुल्झादियाँ

महीनों से था इन्तजार
मुझे रंगीली होली का
करने को कपोलों प्रहार
किसी सांवली सलोनी का
मूक बन कर सोचते रहे
वो आएगी खेलने होली
कीचड मल के मेरे मुख पे
कब कब में चली गई
कर ना सके दीदार
उस सांवली सलोनी का ,
मजा किरकिरा हो गया
जब रंगदार होली का
छुटाने चले कीचड
तब हमको पता चला
कितना चिपकू था प्यार
सावली सलोनी शर्मीली चमेली का \

Monday, August 2, 2010

चुटकुला

एक आदमी की इच्छा थी की उसके पास भी एक छोटी मोटीकार हो तो खूब घूमा फिरेगा ,ऐश करेगा ,तो वो एक ज्योतिषी के पास गया बोला बाबा मुझे एक कार चाहिए ,बताओ मैं क्या करूँ किसकी पूजा करूँ ,पंडितजी ,बोले भाई गणपति ही ऐसे हैं जो सबकी इच्छा पूर्ण कर देते हैं ,तो उसने उनकी पूजा करनी शुरू कर दी ,एक दिन अचानक गणेश जी प्रकट हो गए बोले बच्चा मैं तेरी अराधना से खुश हुआ बोल क्या चाहिए ,
वो बोले गणेश जी मुझे ज्यादा कुछ नहीं बस एक वाहन दिला दो ,तो गणेश जी बोले ,बताओ कौन सा वाहन चाहिए बच्चा ,वो बोला एक कार दिला दो ,गणेश जी बोले बेटा अगर मेरे बस में ये सब होता तो मैं खुद ही क्यों इस चूहे पे बैठके घूमता ,

Saturday, July 31, 2010

आज फ्रेंडशिप डे है

बरसात में क्यों भीगती हो ,
दूर दूर से देखकर रीझती हो ,
नहीं देखता तो पसीजती हो ,
पास आता हूँ तो खीजती हो ,
बातेंकरूँ तो नयन मुंदती हो ,
दूर जाऊं तो बाल खींचती हो ,
आज तो फ्रेंडशिप डे है ,
फिर क्यों ना चीखती हो ।

Tuesday, March 10, 2009

होली फोबिया

सालियाँ ,सलहज ,भाबियाँ
सब मुझसे चिपट गईं
रंग व गुलाल के बदले
लिपस्टिक और सिन्दूर
गालों पर रगड़ गयीं
बजाय कुछ पिलाने के
लोटा खाली कर गईं
सारी लस्सी ख़ुद पीकर
मुंह में निप्पल लगाकर हमारे
ख़ुद वहाँ से चली गईं
कार्नर को इजहार होली का ,
करके सबने एका
होली खेलने का
ले लिया ठेका
फाड़ दिए सब वस्त्र मेरे
बच्चा रहा केवल लंगोटा
खेल रहा होली ससुराल में
बनकर मैं
भैंसा बुग्गी का झोटा .